रविवार, 16 अगस्त 2009

तू खुदा है, मै खुदा नहीं एक इंसान हूँ मै ,
कुछ वज़ह है जो इतना परेशान हूँ मै ,

ईमान की खातिर ही उस दिन बेईमानी कर ली,
ईमान ना रहा तो अब बेईमान हूँ मै,

रिश्तों की अहमियत को मै समझ न पाता,
पर वो भी नहीं समझा तो हैरान हूँ मै,

माफ़ी की ख्वाहिशें थीं तो कुछ गलतियाँ कर ली,
माफी की छोड़ो आज फिर बदनाम हूँ मै,

गुनाहों के अँधेरे में अब जा सो जा सहर,
कोई किरण भी आयेगी तो अनजान हूँ मै.

गलतियाँ खुदा नहीं इन्सान से ही होतीं हैं,
फिर उसने क्यों समझा की भगवान हूँ मै,

शिवा नन्द सहर की कुछ यांदें ग़ज़ल में : सहर कवि शिवा

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